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ये दिल भी हुसैनी है ये जाँ भी हुसैनी है / Ye Dil Bhi Hussaini Hai Ye Jaan Bhi Hussaini Hai

ये दिल भी हुसैनी है, ये जाँ भी हुसैनी है सद-शुक्र कि अपना तो ईमाँ भी हुसैनी है तू माने या न माने, अपना तो 'अक़ीदा है हर क़ारी के होंटों पर क़ुरआँ भी हुसैनी है रौनक़ है मसाजिद में शब्बीर के सदक़े से मिम्बर भी हुसैनी है, आज़ाँ भी हुसैनी है जिब्रील झुलाता है हसनैन के झूले को लगता है कि आक़ा का दरबाँ भी हुसैनी है गिरने नहीं देता है काँधों से नवासों को क्या ख़ूब कि नबियों का सुल्ताँ भी हुसैनी है धड़कन की नगरिया में देखा तो नज़र आया हसरत भी हुसैनी है, अरमाँ भी हुसैनी है तुम समझो या न समझो, ऐ अहल-ए-जहाँ ! लेकिन है लब पे जो हाकिम के ये बयाँ भी हुसैनी है शायर: अहमद अली हाकिम ना'त-ख़्वाँ: मीलाद रज़ा क़ादरी अहमद अली हाकिम हसन बिन ख़ुर्शीद ye dil bhi husaini hai, ye jaa.n bhi husaini hai sad-shukr ki apna to imaa.n bhi husaini hai tu maane ya na maane, apna to 'aqeeda hai har qaari ke honto.n par qur.aa.n bhi husaini hai raunaq hai masaajid me.n shabbir ke sadqe se mimbar bhi husaini hai, aazaa.n bhi husaini hai jibreel jhulaata hai hasnain ke jhoole ko ...

न ऐसी ज़ुल्फ़ें न ऐसा चेहरा न यूँ किसी पे शबाब होगा / Na Aisi Zulfein Na Aisa Chehra Na Yun Kisi Pe Shabab Hoga

न ऐसी ज़ुल्फ़ें, न ऐसा चेहरा, न यूँ किसी पे शबाब होगा जवाब होंगे सभी के लेकिन, न मुस्तफ़ा का जवाब होगा जो चेहरा निकले तो होगी सुब्ह, जो ज़ुल्फ़ बिखरे तो रात होगी पसीना उन का गिरेगा जिस पर, वही तो ज़र्रा गुलाब होगा ब-रोज़-ए-महशर हसीन सारे, इकट्ठे होंगे मुक़ाबले को तो सब से पहले यक़ीन मानो बिलाल का इंतिख़ाब होगा कि इतने लाशे पड़े हैं करबल, हुसैन का सर कहाँ है बोलो ? जवाब आया, कहीं वो नेज़े पे पढ़ता उम्म-उल-किताब होगा नबी का रौज़ा हमारी जाँ है, उसी के दर्शन से ज़िंदगी है कभी जो निकले कू-ए-नबी से तो मरना-जीना 'अज़ाब होगा ये ज़ेर-ए-मदफ़न फ़रिश्ते बोले, सुनाओ आक़ा की ना'त, हाकिम ! तुम्हें सुना कर सवाब होगा, तो हम को सुन कर सवाब होगा शायर: अहमद अली हाकिम ना'त-ख़्वाँ: अहमद अली हाकिम सय्यिद अरशद शाह जावेद रज़ा अब्दुल अज़ीज़ मुहम्मदी na aisi zulfe.n na aisa chehra na yu.n kisi pe shabaab hoga jawaab honge sabhi ke lekin na mustafa ka jawaab hoga jo chehra nikle to hogi sub.h jo zulf bikhre to raat hogi paseena un ka girega jis par wahi to zarra gulaab hoga ba-roz-...

सरदारियाँ मुख़्तारियाँ मुहम्मद उत्ते ख़तम हो गइयाँ / Sardariyan Mukhtariyan Muhammad Utte Khatam Ho Gaiyan

Sardariyan Mukhtariyan Lyrics in Hindi, English & Urdu सरदारियाँ मुख़्तारियाँ मुहम्मद उत्ते ख़तम हो गइयाँ दिलदारियाँ ते यारियाँ मुहम्मद उत्ते ख़तम हो गइयाँ अक़्सा दे विच यूसुफ़ कह्या, मैं हुण कदों सोहणा रह्या क़ुदरत दियाँ शाहकारियाँ मुहम्मद उत्ते ख़तम हो गइयाँ रुत्बा किसे पाणा ई नईं, नबी हुण कोई आणा ई नईं नबुव्वत दियाँ कुल वारियाँ मुहम्मद उत्ते ख़तम हो गइयाँ चन तोड़ के जोड़े केह्ड़ा, सूरज पिच्छाँ मोड़े केह्ड़ा ए 'अज़मताँ सुन सारियाँ मुहम्मद उत्ते ख़तम हो गइयाँ असरा दी शब बोसे लवे, रूह-उल-अमीं हाकिम कह्वे हुब्दारियाँ मनठारियाँ मुहम्मद उत्ते ख़तम हो गइयाँ शायर: अहमद अली हाकिम ना'त-ख़्वाँ: अहमद अली हाकिम हसनैन ज़ुलक़रनैन फ़याज़ क़व्वाल sardaariyaa.n muKHtaariyaa.n muhammad utte KHatam ho gaiyaa.n dildaariyaa.n te yaariyaa.n muhammad utte KHatam ho gaiyaa.n aqsa de wich yusuf kehya mai.n hun kado.n sohna rehya qudrat diyaa.n shaahkaariyaa.n muhammad utte KHatam ho gaiyaa.n rutba kise paana ee nai.n nabi hun koi aana ee nai.n nabuwwat diyaa.n kul w...

सामने हो अगर रू-ए-ख़ैर-उल-बशर फिर इबादत का कितना मज़ा आएगा / Samne Ho Agar Roo-e-Khairul Bashar Phir Ibadat Ka Kitna Maza Aayega

सामने हो अगर रू-ए-ख़ैर-उल-बशर, फिर 'इबादत का कितना मज़ा आएगा दिल में है आरज़ू, वो जो हों रू-ब-रू, फिर तिलावत का कितना मज़ा आएगा चाँद उन को जो देखे तो हो शर्मगीं, तक के यूसुफ़ कहे आफ़रीं आफ़रीं गेसू-ए-'अम्बरीं सरक जाए कहीं, फिर ज़ियारत का कितना मज़ा आएगा सर पे सिद्दीक़ आँखों में 'उस्मान हो, धड़कनों में 'उमर जान-ए-जाँ हो 'अली ये सभी मो'तबर हम-सफ़र हों अगर, फिर रफ़ाक़त का कितना मज़ा आएगा मुझ को ऐसे ही बीमार रहने दो तुम, न दवा चाहिए न शिफ़ा चाहिए मेरी लेने ख़बर आएँ आक़ा अगर, फिर 'इयादत का कितना मज़ा आएगा बाब-ए-जन्नत पे रिज़वान रोके हमें, ठहर जाएँगे लेकिन सुनो, दोस्तो ! जब मुहम्मद कहेंगे कि मेरे हैं ये, फिर इजाज़त का कितना मज़ा आएगा बोले इब्न-ए-'अली कर्बला में सुनो घर लुटाना भी है, सर कटाना भी है जब हो सज्दा अदा सामने हो ख़ुदा, फिर शहादत का कितना मज़ा आएगा महफ़िल-ए-ना'त महशर में जब हो सजी, मीर-ए-मज्लिस हों जिस वक़्त, हाकिम ! नबी इज़्न हो ना'त पढ़ ऐ मेरे उम्मती ! फिर समा'अत का कितना मज़ा आएगा शायर: अहमद अली हाकिम ना'त-ख़्वाँ: अहमद अली हाकिम मुहम्मद आदिल...

तुम्हारे रुख़ पर जमी हैं आँखें मैं कैसे रुख़ से हटाऊँ अखियाँ / Tumhare Rukh Par Jami Hain Aankhen Main Kaise Rukh Se Hataun Akhiyan

तुम्हारे रुख़ पर जमी हैं आँखें, मैं कैसे रुख़ से हटाऊँ अखियाँ क़सम ख़ुदा की बड़े हसीं हो, मैं कैसे आख़िर मिलाऊँ अखियाँ नमाज़ पढ़ने को मैं था आया, तुम्हें जो देखा तो पढ़ ली मैं ने तुम्हारी सूरत है मेरे आगे, मैं कैसे अपनी झुकाऊँ अखियाँ जिधर भी जाऊँ, जिधर भी देखूँ, तुम्हारे चर्चे, तुम्हारे जल्वे तुम्हीं बसे हो मेरी नज़र में, किसी को क्यूँ मैं दिखाऊँ अखियाँ ये बात, हाकिम ! मैं सोचता हूँ कि ख़ुद मुसव्विर ने पूछा होगा मैं नक़्श तेरे बना रहा हूँ, बताओ कैसी बनाऊँ अखियाँ शायर: अहमद अली हाकिम ना'त-ख़्वाँ: अहमद अली हाकिम मुहम्मद आदिल क़ुरैशी सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी tumhaare ruKH par jami hai.n aankhe.n mai.n kaise ruKH se haTaau.n akhiyaa.n qasam KHuda ki ba.De hasee.n ho mai.n kaise aaKHir milaau.n akhiyaa.n namaaz pa.Dhne ko mai.n tha aaya tumhe.n jo dekha to pa.Dh li mai.n ne tumhaari soorat hai mere aage mai.n kaise apni jhukaau.n akhiyaa.n jidhar bhi jaau.n, jidhar bhi dekhu.n tumhaare charche, tumhaare jalwe tumhi.n base ho meri nazar me.n kisi ko kyu.n mai.n ...

मेरे आक़ा आओ कि मुद्दत हुई है / Mere Aaqa Aao Ke Muddat Hui Hai

मेरे आक़ा ! आओ कि मुद्दत हुई है तेरी राह में अखियाँ बिछाते बिछाते तेरी हसरतों में, तेरी चाहतों में बड़े दिन हुए घर सजाते सजाते मेरा है ये ईमाँ, ये मेरा यक़ीं है मेरे मुस्तफ़ा सा न कोई हसीं है कि रुख़ उन का देखा है जब से क़मर ने निकलता है मुँह को छुपाते छुपाते मेरे लब पे, मौला ! न कोई सदा है फ़क़त मुझ निकम्मे की ये ही दु'आ है मेरी साँस निकले दर-ए-मुस्तफ़ा पे ग़म-ए-दिल नबी को सुनाते सुनाते ये दिल जब से 'इश्क़-ए-नबी में पड़ा है न दिन की ख़बर है, न शब का पता है कि अब तो बसारत भी कम हो गई है तेरे ग़म में आँसू बहाते बहाते क़यामत का मंज़र बड़ा पुर-ख़तर है मगर मुस्तफ़ा का जो दीवाना होगा वो पुल से गुज़र जाएगा वज्द करते ये ना'रा नबी का लगाते लगाते ये माना कि इक दिन आनी क़ज़ा है मगर, दोस्तो ! तुम से ये इल्तिजा है कि शहर-ए-मुहम्मद की हर इक गली से जनाज़ा उठाना घुमाते घुमाते है का'बे की 'अज़मत भी अपनी जगह पर मगर दिल में, हाकिम ! तमन्ना यही है जो मिल जाए नक़्श-ए-कफ़-ए-पा-ए-अहमद तो मर जाऊँ सर को झुकाते झुकाते शायर: अहमद अली हाकिम ना'त-ख़्वाँ: शाहबाज़ क़मर फ़रीदी ज़ोहैब अशरफ़...

कहा रब ने मुहम्मद से वादा ये हमारा है / Kaha Rab Ne Muhammad Se Wada Ye Hamara Hai

कहा रब ने मुहम्मद से, वा'दा ये हमारा है हम देंगे उसे जन्नत, नौकर जो तुम्हारा है देखो तो सही मेरे शाहकार के जल्वों को जैसा है कहा इस ने, वैसा ही सँवारा है जिस दिन से मिली निस्बत सरकार-ए-दो-'आलम की उस दिन से बुलंदी पर क़िस्मत का सितारा है यूसुफ़ के लबों पर भी ये ज़िक्र था महशर में सरकार के चेहरे का क्या ख़ूब नज़ारा है क्या शान-ए-मुहम्मद है ! महबूब की मद्ह में उस रब्ब-ए-दो-'आलम ने क़ुरआन उतारा है ये कम तो नहीं, हाकिम ! करता हूँ सना उस की कहते हैं जिसे अहमद, हर इक से जो प्यारा है दाना भी उन्हीं का है, पानी भी उन्हीं का है हसनैन के टुकड़ों पर दुनिया का गुज़ारा है जिब्रील-ए-अमीं बोले, कोई भी नहीं उन सा क़ुदरत ने मुहम्मद को कुछ ऐसा सँवारा है शब्बीर ये कहते थे कर्बल में फ़िदा हो कर जो कुछ भी था, ऐ नाना ! तेरे नाम पे वारा है शायर: अहमद अली हाकिम ना'त-ख़्वाँ: अहमद अली हाकिम अज़मत रज़ा भागलपुरी kaha rab ne muhammad se, waa'da ye hamaara hai ham denge use jannat, naukar jo hamaara hai dekho to sahi mere shaahkaar ke jalwo.n ko jaisa ...

इतना काफ़ी है ज़िंदगी के लिए / Itna Kafi Hai Zindagi Ke Liye

इतना काफ़ी है ज़िंदगी के लिए रख लें आक़ा जो नौकरी के लिए इतना काफ़ी है ज़िंदगी के लिए माह-ओ-ख़ुर्शीद उन की चौखट पर रोज़ आते हैं रौशनी के लिए इतना काफ़ी है ज़िंदगी के लिए चाँद-तारे भी उन के क़दमों में रोज़ आते हैं रौशनी के लिए इतना काफ़ी है ज़िंदगी के लिए दोनों 'आलम बनाए मौला ने या नबी ! सिर्फ़ आप ही के लिए इतना काफ़ी है ज़िंदगी के लिए तक के उन को अय्यूब के घर में महल तरसे हैं झोंपड़ी के लिए इतना काफ़ी है ज़िंदगी के लिए आ गए क़ब्र में भी छुड़वाने दर्द कितना है उम्मती के लिए इतना काफ़ी है ज़िंदगी के लिए लंबे सज्दे किये नबी ने, कहा ऐ नवासे ! तेरी ख़ुशी के लिए इतना काफ़ी है ज़िंदगी के लिए दीद माँगी है उन की, ऐ हाकिम ! मैं ने बस वक़्त-ए-आख़री के लिए शायर: अहमद अली हाकिम ना'त-ख़्वाँ: अहमद अली हाकिम हाफ़िज़ कामरान क़ादरी क़ारी शाहिद महमूद क़ादरी itna kaafi hai zindagi ke liye rakh le.n aaqa jo naukari ke liye itna kaafi hai zindagi ke liye maah-o-KHurshid un ki chaukhaT par roz aate hai.n raushani ke liye itna kaafi hai zindagi ke liye chaand-taare bhi un ke qadmo....

अली वर्गा ज़माने ते कोई पीर विखा मैनूं / Ali Warga Zamaane Te Koi Peer Vikha Mainoon

अली वर्गा ज़माने ते कोई पीर विखा मैनूं अली बाह्झ मुहम्मद दा कोई वीर विखा मैनूं अली वर्गा ज़माने ते कोई पीर विखा मैनूं उच्ची ज़ात अली दी ए, काएनात अली दी ए अली जितनी किसे दी वी जागीर विखा मैनूं अली वर्गा ज़माने ते कोई पीर विखा मैनूं एदा हथ यदुल्लाह ए, चेहरा वज्हहुल्लाह ए एदी सूरत जई कोई तस्वीर विखा मैनूं अली वर्गा ज़माने ते कोई पीर विखा मैनूं का'बे विच आवण है, मस्जिद विच जावण है अली वर्गी किसे दी वी तौक़ीर विखा मैनूं अली वर्गा ज़माने ते कोई पीर विखा मैनूं अली दिल नूं तोड़ दा नैं, अली ख़ाली मोड़ दा नैं अली वर्गा ज़माने ते कोई अमीर विखा मैनूं अली वर्गा ज़माने ते कोई पीर विखा मैनूं हाकिम है अली, हाकिम !, है शेर-ए-जली, हाकिम ! मेरे गल विच बिन एदे ज़ंजीर विखा मैनूं अली वर्गा ज़माने ते कोई पीर विखा मैनूं शायर: अहमद अली हाकिम नात-ख़्वाँ: अहमद अली हाकिम ali warga zamane te koi peer lyrics in hindi,uchi zaat ali di ay lyrics in hindi,vakha menun, mainun, wargha varga vargha jamane zamaane jamaane te koi pir vekha vikha menu maynu menun maynun mainun mainu baaj baj baz mohammad veer vir ...